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PAK-आतंकियों की अब खैर नहीं, अंतरिक्ष से नजर रखेगा इसरो का एमीसेट

एमीसेट एक मिलिट्री उपग्रह है. इसके जरिए सीमाओं पर तैनात दुश्मन के राडार और सेंसर पर निगरानी रखी जा सकती है. दुश्मन के इलाकों का सही इलेक्ट्रॉनिक नक्शा बनाने और दुश्मन के इलाके में मौजूद मोबाइल समेत अन्य संचार उपकरणों की सटीक जानकारी देगा एमीसेट. अब आतंकी गतिविधियों पर नजर रखेंगी अंतरिक्ष में तैनात हमारी इलेक्ट्रॉनिक खुफिया निगाहें. पाकिस्तान की सीमाओं पर किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट या मानवीय मूवमेंट पर नजर रखेगा इसरो का एमीसेट. एमीसेट को इसरो और डीआरडीओ ने मिलकर बनाया है. इसरो इस उपग्रह को 1 अप्रैल को अंतरिक्ष में छोड़ेगा. अंतरिक्ष में इसकी तैनाती के बाद भारतीय रक्षा एवं निगरानी सेवाओं में कई गुना इजाफा हो जाएगा. डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक रवि गुप्ता और इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार एमीसेट एक मिलिट्री उपग्रह है. इसके जरिए सीमाओं पर तैनात दुश्मन के राडार और सेंसर पर निगरानी रखी जा सकती है. दुश्मन के इलाकों का सही इलेक्ट्रॉनिक नक्शा बनाने और दुश्मन के इलाके में मौजूद मोबाइल समेत अन्य संचार उपकरणों की सटीक जानकारी देगा एमीसेट. बालाकोट में हुए एयरस्ट्राइक के बाद एनटीआरओ ने बताया था कि हमले के समय बालाकोट में 300 मोबाइल एक्टिव थे. लेकिन इस पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. अब ऐसे सवाल नहीं उठेंगे. 24 जनवरी को भी इसरो ने डीआरडीओ के उपग्रह माइक्रोसैट-आर को लॉन्च किया था. यह सैटेलाइट रात में भी तस्वीरें लेने में सक्षम है.

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